सरहदों पे लड़े जो लेकर जान हथेली पे वो भूख हड़ताल पर हैं एक सी पेंशन पाने को । कि सब हुक्मरानो-विरोधी एक हो बैठे कंवल अपने तनख़्वाहो-भत्ते दोगुने करवाने को । #कंवल
by अहं सत्य
बहुत आसाँ है ज़ुबाँ को बल दे चाय की चुस्की संग हालात-ऐ-हाज़रा पे तपसरा कहना, कि लफ्ज़ उनके ही वज़न रखते हैं कंवल जो दो हाथों में कुछ करने का मादा रखते हैं । #कंवल
by अहं सत्य