Thursday, December 31, 2015

Kanwal Speaks - December 31, 2015 at 09:11PM

टंगा था जो तेरी दीवार पे बस वो कैलंडर ही बदला तो हंगामा यूँ बरपा, आख़िर दिनो-रात वही है तूँ भी वही सब कुछ तो वही कंवल इस जहाँ में । #कंवल
by अहं सत्य

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Kanwal Speaks - December 31, 2015 at 09:06PM

नयेपन की चाह में भटक रहा जो ज़िन्दगी भर तूँ इधर-उधर, हर घड़ी दास्तान नई कंवल देखने वाली बस आँख भर चाहिए । #कंवल
by अहं सत्य

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Kanwal Speaks - December 31, 2015 at 08:49PM

ये जाते हुए लम्हें न थाम सका है कोई न कभी कोई रोक पाएगा, यह वक्त है कंवल अपनी चाल में यूँ ही गुज़रता चला जाता है । #कंवल
by अहं सत्य

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Kanwal Speaks - December 31, 2015 at 05:11PM

काश सोशल मीडिया पर ज़बरदस्ती भगवान का नाम लिखने-लिखवाने की किसी बेवकूफ़ी से आपके और औरों के पाप धुल पाते, पर शायद आपको सिर्फ ढकवंज और आडंबर से ही प्यार है; अपने कर्मों में सदाचार व सुकृत धारण करने का मुश्किल परंतु यथार्थक रास्ता आप कभी नहीं चुनना चाहते । #कंवल
by अहं सत्य

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Kanwal Speaks - December 31, 2015 at 04:29PM

बिना दस्तक दहलीज़ लाँघ कर आई ज़िंदगी और बोली, बहुत हुया अब साथ चलो मेरे आज तुम्हें लेने आई हूँ । #कंवल
by अहं सत्य

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Wednesday, December 30, 2015

Kanwal Speaks - December 31, 2015 at 11:58AM

Your thoughts do influence the opinions of others about you along with creating an image of yours based upon the expression of theirs at right time and at right place, but that are your actions which shape the person you actually are and the character you are carrying with. #Kanwal
by अहं सत्य

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Kanwal Speaks - December 31, 2015 at 09:02AM


by अहं सत्य

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Kanwal Speaks - December 30, 2015 at 10:30PM

लड़ो, कि जब तक साँस है, चल रहे हैं प्राण इस मिट्टी की ढेरी में, और तब तक एक कतरा भी जब लहू का है बाकी इस तन में तुम्हारे, क्योंकि समर्पण तो बस मुर्दा करते हैं; ज़िंदा तो अपने हकों पर डाका डालने वालों को चीर कर रख देते हैं, फिर भले उनको अपनी तलवार भी अपनी पसली की हड्डी निकालकर ही बनानी पड़े । #कंवल
by अहं सत्य

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