Wednesday, August 30, 2017

Kanwal Speaks - August 31, 2017 at 10:05AM

धर्मस्थान और शौचालय में बस यही अंतर है कि धर्मस्थान से व्यक्ति मल सिर पर ढो कर लाता है और शौचालय में जाकर मल से निवृत्त होता है ।
by अहं सत्य

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Kanwal Speaks - August 31, 2017 at 10:01AM

किसी भी आम इंसान की नित्यप्रति जरूरतों में धर्मस्थान से ज्यादा उपयोगी शौचालय है ।
by अहं सत्य

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Kanwal Speaks - August 31, 2017 at 09:05AM

जब तक ईश्वर नाम की बीमारी रहेगी तब तक उसके यह लक्षण पैगंबर, अवतार, मसीहा, गुरु, संत, बाबा, योगी, चमत्कारी, सिद्ध, साधु, दरवेश, साईं, फ़कीर, शेख, औलिया, इत्यादि भी ऐसे ही बने रहेंगे; अगर लक्षणों के ताप से निजात चाहिए तो रोग को जड़ से मिटाना होगा । #कंवल
by अहं सत्य

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Kanwal Speaks - August 31, 2017 at 05:39AM

मज़हब से गंदा धंधा दुनिया में और दूसरा कोई नहीं । #कंवल
by अहं सत्य

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Kanwal Shared - अहं - August 30, 2017 at 06:05PM


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