Take and Philosophy of "Kawaldeep Singh Kanwal" on this Universe and happenings in and around.
Thursday, August 31, 2017
Kanwal Speaks - August 31, 2017 at 07:24PM
ख़ुदा को हलाल करके बनाया गया तंदूरी मीट बटर नान के साथ बड़ा लज़ीज़ लगता है ।
by अहं सत्य
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Wednesday, August 30, 2017
Kanwal Speaks - August 31, 2017 at 10:05AM
धर्मस्थान और शौचालय में बस यही अंतर है कि धर्मस्थान से व्यक्ति मल सिर पर ढो कर लाता है और शौचालय में जाकर मल से निवृत्त होता है ।
by अहं सत्य
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Kanwal Speaks - August 31, 2017 at 10:01AM
किसी भी आम इंसान की नित्यप्रति जरूरतों में धर्मस्थान से ज्यादा उपयोगी शौचालय है ।
by अहं सत्य
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Kanwal Speaks - August 31, 2017 at 09:05AM
जब तक ईश्वर नाम की बीमारी रहेगी तब तक उसके यह लक्षण पैगंबर, अवतार, मसीहा, गुरु, संत, बाबा, योगी, चमत्कारी, सिद्ध, साधु, दरवेश, साईं, फ़कीर, शेख, औलिया, इत्यादि भी ऐसे ही बने रहेंगे; अगर लक्षणों के ताप से निजात चाहिए तो रोग को जड़ से मिटाना होगा । #कंवल
by अहं सत्य
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Tuesday, August 29, 2017
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